_____ सत्य मेरा चिर हो, न हो | मधु सा रस हो, जीवन के लिए || शिव अपने सा संकल्प मुझे दो | लक्ष्य सधे, कर्म हो अर्पण के लिए _____ _________________________________________________Ambika Sharma__________________________________________________

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Tuesday, 9 May 2017

चंद्रोदय - 1

भाग - (1)

“टप......टप ........टप ........” घोड़े की टाप कच्ची जमीन पर धूल उड़ाती, घन घोर जंगलो को पार करती आगे बढ़ रही थी, घोड़े पर एक अठारह बीस साल का नौजवान योद्धा सवार था| लालिमा लिये मुख मंडल, जिस पर हल्की सी मूछ रेख उगी थी, घनी घनी भौहे, तनी छाती, चौड़े कंधे, लम्बा कद, लम्बी नुकीली सी नाक, बड़ी बड़ी आँखें, चौड़ा माथा,अत्यंत सुन्दर नैन नक्श, कुशल योद्धा की भाँती एक हाथ में तलवार लिये और दूसरे हाँथ में घोड़े की चाबुक पकडे चला जा रहा था|

संभवतः राह भटक गया था |

घोडा हवा से बातें करता आगे बढ़ रहा था, सहसा एक गाँव दिखाई दिया, घुड सवार ने घोड़े को रोका, घोड़ें ने अपने दोनों अगले पैर हवा में ऊपर की ओर उठायें, घुड़सवार ने अपनी तलवार हवा में ऊपर उठाई “जय भवानी” का उदघोष किया | मानो अपने आगमन की सूचना दी हो|

घुड़सवार अब पैदल ही घोड़े के साथ धीरे धीरे गाँव भीतर प्रवेश कर गया | गाँव भीतर प्रवेश करते ही एक कुंआ दिखाई दिया जिसमे पनहारिन स्त्रियाँ पानी भरते दिखाई दी,स्त्रियों के वस्त्र से स्पस्ट था की गाँव संपन्न है | घुड़सवार ने घोड़ें को रोका और कुयें की जगत की ओर बढा, एक पानी भरती स्त्री से बोला-

“मै एक पथिक हूँ, राह भटक गया हूँ,मै और मेरा घोडा दोनों प्यासे है, पानी मिलेगा क्या ?”

“ऐ जी जी, ये मरद जात सुन्दर स्त्री को कुयें में देख कर प्यासे क्यों हो जाते है?” उस स्त्री ने दूसरी स्त्री से हँसते हुये पूछा

“इसकी तो अभी तक मूंछ रेख भी नही आई और अभी से प्यासा हो उठा” दूसरी स्त्री ने घुड़सवार की ओर देखते हुयें कहा, दोनों स्त्रियाँ ठहाका मार कर हंस पड़ी|

“देखियें, मै लगभग बीस कोस से रास्ता भटका हुआ हूँ, मुझे कोई गाँव नही मिला, मै और मेरा घोडा दोनों सचमुच ही प्यासे है, कृपया ब्यंग न करे .......पानी पिला दीजिये” घुड़सवार ने शिष्टाचार के साथ कहा|

“देखो बबुआ, हमने तुम जैसे बहुत प्यासे देखे है, जाओ कही और अपनी प्यास बुझाओ, यहाँ तुम्हारी प्यास न बुझाने बाली” एक स्त्री ने बिना घुड़सवार की ओर देखे ही उत्तर दिया

“ना जी जी, बांका सवार है, जवान भी है और सुन्दर भी है बुझा दे इसकी प्यास” दूसरी स्त्री ने कहाँ फिर दोनों ठहाका मार कर हंस पड़ी

“आप लोगो को तो अतिथि सत्कार ही नही आता बेहद बाचल है आप” बोलते हुयें घुड़सवार कुयें की जगत की ओर बढ़ चला, उनके बर्तनों को पैर से ठोकर मारते हुये बोला “मै अपना परिचय देना नहीं चाहता था लेकिन अब आप लोगो को सबक सिखाने के लिये मुझे अपना परिचय देना ही पड़ेगा” घुड़सवार ने उनके सभी बर्तन फोड़ डाले |

“ये क्या जबरजस्ती है? हमें नही पिलाना पानी तो क्या कोई जबरजस्ती है ?” दोनों स्त्रियाँ  जोर जोर से बडबडाने लगी |

घुडसवार बिना उन पर ध्यान दिये, वापस मुड़ा, पीछे देखा, उसका घोडा सामने एक बाग़ में घुस कर अपना पेट भर रहा था, घुड़सवार अपने घोड़े की ओर बढ़ चला|

“अभी राजा जी को पता चल जाएँ तो इसकी चमड़ी उधेड़ कर ............” स्त्रियाँ अभी भी प्रलाप कर रही थी |

घुड़सवार ने देखा की उसका घोडा सामने का बाग उजाड़ रहा है, वो उसे रोकने के लिये तेजी से घोड़े की ओर भागा, सामने से दो माली भी घोड़े को रोकने के लिये, लाठी ले कर घोड़े की ओर दौड़े, एक माली ने फेंक कर लाठी घोड़े को मारी, घोडा पीछे की ओर रुका, मुड़ा, तब तक घुड़सवार और दोनों माली घोड़े के पास आ गये|

“कम्बखत, अपने बाप का माल समझे है, जो बाग उजाड़ रहा है” एक माली चिल्ला कर, एक भद्दी गाली देते हुये बोला|

घुड़सवार ने अपने ओंठो पर तर्जनी उंगली रखते हुये माली को चुप रहने का इशारा किया|



“ये है इस घोड़े का मालिक, दोनों की मुसके बांध कर यही फेंक दो, इन्हें खुद राजा साहब सजा देंगे, हरामजादें ने उनका बगीचा उजाड़ा है” दूसरा माली बींच में बोल पड़ा|

घुडसवार चुप चाप बाग़ देख रहा था, बाग सुन्दर था, सलीके से कई क्यारियाँ बनाई गई थी, जिनमे सुन्दर फूलदार अलग अलग प्रकार के पौधे लगे थे, कुछ फूलदार, फलदार बड़ें बड़ें पेड़ भी सजे थे, सुगन्धित हवा बह रही थी, बाग में बैठने के लिये मँहगी नक्कासीदार कुर्सिया और शानदार झूले लगे थे, बाग की सुन्दरता से ही लगता था यह किसी शौकीन राजा का प्रिय बाग था, बाग़ की साफ सफाई से लगता था जैसे यहाँ राजा, रानी और उनके परिवारिक जन नित्य प्रति घूमने आते है|

“यह किसका बाग है?” घुड़सवार ने क्रोध रोक कर, शांत भाव में पूछा- 

“हरामखोर ! यह उरई के राजा माहिल का प्रिय बाग़ है जिसे तुम्हारे हरामखोर घोड़े ने .........” माली आगे कुछ बोल पाता की घुड़सवार ने आगे बढ़ कर माली के मुंह पर एक जोरदार थप्पड़ मार दिया, माली जहाँ खड़ा था वही कटे पेड़ सा गिर पड़ा|

दूसरा माली प्रहार करने के लिये घुड़सवार की ओर दौड़ा लेकिन घुड़सवार की बड़ी बड़ी घूरती आँखे देख कर सहम गया, भय से बाग से बाहर जाने के लिये दौड़ पड़ा, शायद अपने राजा से घुड़सवार की शिकायत करने जा रहा था |

क्रमशः
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AMBIKA SHARMA
AUTHOR, MOTIVATOR, TRAINER, BLOGGER
is famous for his unpublished Novel "AARYAN - EK ALOKIK YOUDHA(आर्यन - एक अलौकिक योद्धा)". Mostly authors known for his English Novels but he is standing in the same lobby for his Hindi novels. Currently his Novel "KAUN JEETA AUR KYU (कौन जीता और क्यों)" is available on all e-commerce websites and leading Bookstores. it is another step of success and he enjoying its bestselling. his another Book is also ready to publish name "PARO KE DIYE (पारो के दीये)" and will be available in 2017.

najar.ambika@gmail.com

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