_____ सत्य मेरा चिर हो, न हो | मधु सा रस हो, जीवन के लिए || शिव अपने सा संकल्प मुझे दो | लक्ष्य सधे, कर्म हो अर्पण के लिए _____ _________________________________________________Ambika Sharma__________________________________________________

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Saturday, 3 December 2016

शीर्षक आप दीजिये

"डू यू लव मी ?"
"यस आई लव यू "
विनीत के प्रश्न पर प्रिया ने टाइप किया और वाट्सएप पर भेज दिया .
नजर घुमा कर देखा उसके पति राज बगल मे ही गहरी नीद मे सो रहे है , मन मे तसल्ली हुई चलो इन्होने देखा नही .
प्रिया  मन ही मन सोच रही थी  विनित मेरा पहला प्यार जब मै बी ए कर रही थी उस समय मेरे  साथ मेरी क्लास में ही  तो था , कितना सुंदर साढे पांच फूट की लम्बाई , गोरा रंग फीचर भी कितने अच्छे , मुझे चाहता भी तो बहुत था लेकिन कितना डरता था ,पहली बार इतना बोलने मे कि वो मुझ से प्यार करता है कितना डरा हुआ था मुझे देखने के लिये मेरे घर कभी किताब लेने के बहाने तो कभी किताब देने के बहाने आया करता था मुझे याद है एक बार नये वर्ष पर कॉपी में छिपा कर ग्रीटिंग दे गया था ,कितना प्यारा लगा था मुझे उस समय विनीत .
चाहती तो मै भी उसे बहुत थी सब कुछ तो ठीक चल रहा था, पता नही अचानक विनीत कहा गायब हो गया था. मै ही विनीत को तलासती रही .समय बीतता गया  विनीत नही आया ,उसके दोस्तों से भी पता लगवाया लेकिन विनीत का कुछ पता नही चला , इधर मेरी मौसी ने अपने रिश्ते में  नौकरी करता लडकाi मेरी शादी के लिये बता दिया, मम्मी पापा को तो जैसे भगवान मिल गये मेरा मन जानने की कोशिश भी नही की और मेरी शादी राज से हो गई .

राज भी ठीक है मेरा साथ हर काम मे देते हमेशा मेरा ध्यान रखते बीस साल बीत गये राज के साथ दो बच्चे भी हो गये बडा लडका रवि तो अब सोलह साल का हो गया कुछ भी हो लेकिन विनीत कभी भी मन से नही गया फेसबुक मे कितना ढूढा विनित को, विनीत मिला भी फेसबुक में लेकिन उसे जोड़ने की मेरी हिम्मत नही हुई .
लेकिन विनित भी मुझे नही भूला उसने तो विदेश मे रहते हुए भी मेरा वाट्सएप नबर मेरी साहेलिओ से ले  लिया , अब आज पूछ रहा है डू यू लव मी प्रिया मुस्कुरा दी, अचानक राज ने करवट ली प्रिया डर गई, राज फ़िर सो गये .प्रिया ने गहरी सांस ली और मोबाइल मे मेसेज टाइप किया
 " फासलो से हासिल क्या ? दिल मे तो तुम ही रहते हो आज भी "
विनीत को भेज दिया 
विनीत का कोई भी उत्तर नही आया .
लगता है सो गया प्रिया ने सोचा फ़िर टाइप किया
 " सो जाओ अब मै भी सोने जा रही हू "
विनीत को मेसेज भेज कर आराम से सो गई.
टिन टिन प्रिया के फोन पर मेसेज आया .प्रिया सो रही थी इस बार राज की नीद खुल गई इतनी रात गये किसका मेसेज होगा राज ने प्रिया का फोन उठा लिया मेसेज विनीत का था 
"ओके माई लव आई लव यू टू ..........अभी बाला भी और बीस साल पहले बाला भी" 
राज की नीद उड़ गई एक साल पहले भी प्रिया के फोन पर उसके एक फेसबूक मित्र के लगभग इसी प्रकार के मेसेज देखे थे कितना कोहराम हुआ था उस समय इन्ही बातो पर जैसे तैसे सब बाते शान्त हुई तो अब ये शुरू , राज को याद आया ये तो विनीत है इसके बारे मे प्रिया ने बताया था कि ये प्रिया के साथ ही पड़ता था उसके मेसेज आते है चैट भी होती है लेकिन मेसेज इस स्तर के हो होते है एसे चैट होती है इसका अन्दाज नही था, राज को .
राज ने पीछे देखा सारे पुराने मेसेज मिटा दिये थे प्रिया ने , राज ने बेकअप मेमोरी मे जाने की कोशिश की लेकिन सफल नही हो पाया .
ना जाने क्या क्या सोचते सोचते राज को नीद आ गई..
सुबह सुबह प्रिया ने राज को जगाया " देखिये मेरा वाट्सएप नही चल रहा "
राज को याद रात मे शायद बेकअप मेमोरी मे जाने के बाद नंबर वेरिफिकेसन नही हुआ इसलिये वाट्सएप नही चल रहा"तुम रात मे बहुत देर तक चैट करती रही ?"
राज ने वाट्सएप ठीक करने के बाद प्रिया से पूछा 



"वो मेरी सहेलिया थी "
प्रिया ने उत्तर दिया 
"रात एक बजे तक?"
राज ने फ़िर पूछा "कोई खास बात थी क्या ?"
"नही तो सब एसे ही "
प्रिया ने टालने की कोशिश की 
"एक मेसेज विनीत का भी है रात एक बज कर चार मिनट पर " राज ने पूछा 
ये सुनते प्रिया कुछ घबडाई लेकिन सयत हो कर बोली नही वो कुछ पुरानी बाते ही पूछ रहा था .राज ने आगे कुछ नही पूछा 
दोनो अपने अपने काम मे लग गये .
प्रिया ने विनीत का मेसेज अकेले मे पढा फ़िर मिटा दिया उसे लगा अब राज से क्या बात करूगी इस तरह से पकडी जाउगी ये तो सोंचा ही नही था .प्रिया सोचती रही अंत मे यही सोंचा जो होगा देखा जायेगा राज भी तो अपनी पुरानी गर्ल फ्रेंड से बात करते है वो भी तो ना जाने कितनी औरतो से फोन पर वाट्सएप पर बात करता  है वो कौन सा मेरे मना करने पर मान जाता  है . दे दूगी जवाब .इतना सोंच कर प्रिया अपने काम मे लग गई.
राज पूरे दिन प्रिय के बारे में  सोच सोच कर  परेशान रहा, शाम को प्रिया से भी उतनी ही बात की, जितनी जरूरत थी .रात को प्रिया से राज की बात हुई " मैने ऐसा क्या किया जो तुम इतनी दूरी बना रहे हो ?"
प्रिया ने राज से पूछा .
"तुम्हारी हिम्मत की दाद देनी पडेगी पिछले एक साल मे यह पाचवा ब्यक्ती है जो तुम्हे वाट्सएप पर आई लव यू बोल रहा है और तुम पूछ रही हो तुमने किया क्या है ?"राज ने गुस्से  मे कहा 
"अब उनको इन सब बातो  मे मत जोडो राज वो बाते खत्म हो चुकी है उन बातो के लिये मै माफ़ी माग चुकी हू और तुमने मेरी कसम खा कर कहा था अब ये बाते नही होगी " प्रिया ने कहा 
"तो फ़िर ये नया शुरू हो गया ?" राज ने पूछा 
"मैने तो ऐसा कभी नही कहा तुम भी तो अपनी पुरानी  गर्लफ्रेंड से बात करते हो"
"हा बात करता जरूर हू लेकिन अपनी एक मर्यादा मे अगर मै कुछ मजाक मे बोल भी दू तो वो खुद ही कह देती है यू आर क्रसिंग लिमिट और ये तुम्हे भी पता है और फिर  मैने तुम्हे भी बात करने के लिये तो नही रोका, ना ही कभी इस बात पर ध्यान दिया कि तुम किससे बात करती हो लेकिन बात का अपना स्तर भी तो हो " राज जोर से बोला 
"रहने दो तुम तो मेरे मना करने के बाबजूद मेरी रिश्तेदारी की औरतो और सहेलियो से बात करते थे मैने क्या किया रो ली और शान्त हो गई फ़िर विनीत ने  पूछा था तो मैने उसे ही तो उत्तर दिया था ये तुम्हे भी पता है वो मेरा पहला प्यार है  और मै कौन सा उसके पास भागी जा रही हूँ , हू तो तुम्हारे पास ही ना, एक छोटी सी बात को तुम बेकार मे बढा रहे हो "प्रिया ने उत्तर दिया 
"प्रिया, ये तुम्हे भी पता है जिन औरतो की तुम बात कर रही हो, उनकी मेरी क्या और केसी बाते होती थी और रही बात तुम्हारी तो याद करो तुम्हारी ही एक महिला रिश्तेदार का फोन आ गया था रात मे नौ बजे, तो कितना लडी थी मुझसे और तुमने मुझे रात मे ही भगा दिया था घर से " राज ने कहा 
"वो बाते अलग है उस समय माहौल अलग था उन्हे इन बातो मे मत जोडो ये एक छोटी सी बात है खत्म करो इन्हे " प्रिया ने कहा 
"ये एक छोटी सी बात नही है मै तुमसे हमेशा ही कहता हू कि तुम मेरी बातो की और मेरी कद्र नही करती ये सब बाते आपस मे जुडी है ये फ़ालतू लोग तुम्हारा इतना दिमाग खराब किये रहते है कि तुम्हे मेरी कद्र ही नही है " राज ने कहा
"तुमसे तो कोई फ़ालतू बाते करवा ले" बोलती हुई प्रिया दूसरे कमरे मे चली गई
" हा ये सब फ़ालतू बाते है मैने किसी भी औरत को लव यू नही बोला ये फ़ालतू बात है और तुम जो परिचित अपरचित लडको को आई लव यू बोलो और सुनो ये अच्छी बात है " राज चिल्लाते हुए बोला 
प्रिया सोचती रही ये कैसा नेरो माइंडेड आदमी है मेरा विनीत कितना अच्छा था और है भी अच्छा जब साथ पढता तो टापर था कितना बडी परीक्षा पास करके बंगलौर गया था इंजीनियर बनने तभी तो विदेश चला गया और ये कुये के मेढक तुमने ये बोला और वो बोला यही करते रहेगे . 
फिर भी क्या करू रहना तो यही है इन्ही कूप मंदूप के पास , आज विनीत को मना कर दूगी वो अब मुझे मेसेज ना करे .सोचते सोचते प्रिया ने फोन उठाया देखा विनीत का मेसेज पडा है खुश हो कर प्रिया उसका मेसेज पढने लगी 
"मेरी प्रिया, कल रात तुम्हारा आई लव यू मेसेज पढा, अच्छा तो बहुत लगा लगा तुम बिलकुल नही बदली तुम्हे याद है मै तुम्हे बताये बिना अचानक बंगलौर चला गया था पता है क्यो , क्यो की मैने तुम्हारे बारे मे कुछ गलत  सुना था तुम्हारे कई सारे मित्र है जिनसे तुम दिल खोल कर बाते करती हो सच मानो लडकपन था मुझे उस समय बुरा लगा इसलिये गुस्से  मे, बिना तुमसे मिले बंगलौर चला गया, बाद मे लगा मैने गलत किया, मुझे तुमसे बात करनी चाहिये थी लेकिन कल रात की तुम्हारी बातो से स्पष्ट है मै उस समय भी सही था , 
प्यार शब्द किसी के लिये भी उसके ह्रदय की सबसे कीमती भावना होती है जो तुम्हे अपने पति के लिये रखनी चाहिये जिसके साथ तुम बीस साल से रह रही हो लेकिन ये तुमने अभिनेत्रीओ सा अभिनय करते हुए मुझ से आय लव यूं  कह डाला 
मै सोचता हू , अगर मैने तुमसे शादी की होती और इतने दिनो बाद तुम्हे हमारे साथ का कोई दोस्त मिल जाता तो शायद तुम उससे भी यही सब बोलती मुझे शायद बुरा लगता .
 तुम्हे तो  दोस्त और प्यार के बीच का अंतर ही  नही मालूम तुम्हे शायद बुरा लगेगा क्योकि तुम मेरे प्रश्न का उत्तर नरात्मक देती या कह देती अब इस प्रश्न का कोई अर्थ नही है तो शायद मुझे ख़ुशी होती लेकिन तुम्हारे आय लव यू ने तुम्हे मेरी नजरो में गिरा दिया ......................good bye priya'
पढते पढते प्रिया की आंखो से आँसू बहने लगे.
मित्रो अब इस कहानी का उचित शीर्षक आप मुझे बताये और यह भी बताये कहानी कैसी लगी और राज और प्रिया में गलत कौन है ?
                                    आपका ..........अम्बिका कुमार शर्मा (राजा)

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AMBIKA SHARMA
AUTHOR, MOTIVATOR, TRAINER, BLOGGER
is famous for his unpublished Novel "AARYAN - EK ALOKIK YOUDHA(आर्यन - एक अलौकिक योद्धा)". Mostly authors known for his English Novels but he is standing in the same lobby for his Hindi novels. Currently his Novel "KAUN JEETA AUR KYU (कौन जीता और क्यों)" is available on all e-commerce websites and leading Bookstores. it is another step of success and he enjoying its bestselling. his another Book is also ready to publish name "PARO KE DIYE (पारो के दीये)" and will be available in 2017.

najar.ambika@gmail.com

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