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Wednesday, 5 July 2017

चंद्रोदय - 8

(गतांक से आगे )

इस समय तक भारत में मुस्लिम आक्रमण होने लगे थे | मुस्लिम धर्म प्रचारक भी इस्लाम का प्रचार करने भारत आने लगे थे | कुछ लौट कर वापस गये तो कुछ यही की संस्कृति में रच बस गये |इसी क्रम में सैय्यद ताला अपने पिता के साथ यहाँ आये, फिर यही भारतीय संस्कृति में रच गये, युवा होने पर ताला सैय्यद एक उच्च कोटि के योद्धा के रूप में उभरे, गोरा लाल रंग, भरा पूरा चेहरा, अच्छी कद काठी, पठानों सी बढी दाढ़ी, युद्ध कला में निपुण साथ ही युद्ध की रणनीत बनाने में और युद्ध संचालन में कुशल ताला सैय्यद बनारस के सरदार थे |

ताला सैय्यद की किसी बात पर, बनारस के रजा से अनबन हो गई, नाराज ताला सैय्यद ने बनारस छोड़ दिया और कन्नौज जाने का निश्चय कर लिया क्यों की कन्नौज में अच्छे योद्धाओ को बड़ा सम्मान मिलता था | कन्नौज जाते समय रास्ते में उन्हें गंगा मेला की जानकारी मिली तो वो अपने सैनिको सहित जाजमऊ आ गये मेला देखने, महुबे के डेरे के समीप ही ताला सैय्यद का डेरा भी लगा था |

जाजमऊ के गंगा घाट पर बहुत दूर दूर से राजा, राज कुमार, राजबाड़े के लोग आये थे | सभी के अलग अलग डेरे सजे थे | इसी मेले में माड़ोगढ़ के राजा जम्बे का पुत्र करिंघा भी आया था करिंघा अर्थात रानी मल्हना की सगी बहन कुशला का जेष्ट पुत्र, मल्हना की बहन कुशला मेले में नही आई थी |

क्रमशः
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is famous for his unpublished Novel "AARYAN - EK ALOKIK YOUDHA(आर्यन - एक अलौकिक योद्धा)". Mostly authors known for his English Novels but he is standing in the same lobby for his Hindi novels. Currently his Novel "KAUN JEETA AUR KYU (कौन जीता और क्यों)" is available on all e-commerce websites and leading Bookstores. it is another step of success and he enjoying its bestselling. his another Book is also ready to publish name "PARO KE DIYE (पारो के दीये)" and will be available in 2017.

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