_____ सत्य मेरा चिर हो, न हो | मधु सा रस हो, जीवन के लिए || शिव अपने सा संकल्प मुझे दो | लक्ष्य सधे, कर्म हो अर्पण के लिए _____ _________________________________________________Ambika Sharma__________________________________________________

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Thursday, 15 June 2017

चंद्रोदय - 6

(गतांक से आगे )

“पाय लागू रानी माँ” ऊदल ने रानी मल्हना के पैरो में सिर रखते हुये कहा

“जुग जुग जिये मेरा लाल, उदय की तलवार के आगे कोई योद्धा टिक ना पायें” मल्हना ने उदय के सिर पर हाँथ फेरते हुये कहा 

अरे वाह, आज तो बड़े महान योद्धा उदय सिंह राय हमारे महल में आये है” ऊदल को आया देख कर राजकुमारी चंद्रावल ने  दाहिना हाँथ मटका कर कहा जबकि उसका बाया हाँथ कमर पर था |

“अपने भाई से बात करना सीख ले नही तो छोटी पकड़ कर बाहर पेड़ पर टांग दूगा” ऊदल ने चंद्रावल की छोटी खीचते हुये कहा

“आ ..... लगाती है भाई” चंद्रावल ने छोटी छुडाते हुये कहा

“तुम दोनों फिर लड़ने लगे? बड़े हो गये हो लेकिन बचपना नही गया” रानी मल्हना ने हँसते हुये कहा

“देखो ना रानी माँ, दुनिया भर की बहने अपने भाई को कजली पर एक धागा बांधती है, एक मै हूँ जिसने अपने भाई के हाँथ में इतना मोटा सोने का कड़ा बाँधा है, ये है मेरे भाई जो एहसान न मान कर उल्टा मुझे ही परेसान करते है” चंद्रबल ने शिकायती लहजे में रानी मल्हना से कहा

“एहसान तो तुझे मानना चाहिये जो तेरी बजह से इतना भारी भरकम बोझ हाँथ पर टाँगे घूमता जबकि इसी हाँथ से मुझे तलवार चलानी होती है” ऊदल ने चंद्राबल से कहा

“ऐ ऊदल बहन का दिया कड़ा कभी बोझ नही होता ये तो भाई की रक्षा करने बाला सूत्र है उसका प्यार है ये” रानी मल्हना ने समझाते हुये कहा

“जी रानी माँ, जानता हूँ, मै तो बस चंद्रा को चिढा रहा था, नहीं तो चंद्रा के लिये मेरा वचन है, मै भले ही मर जाँऊ लेकिन इसकी खुशियों और स्वाभिमान पर कभी आंच नही आने दूंगा” ऊदल ने कहा

“मरे मेरे भाई के दुश्मन, मेरा भाई लांखो साल जिये” बोल कर चंद्राबल की आँखे भर आई वो ऊदल से चिपक गई, ऊदल और चंद्राबल दोनों भाबुक हो गये, दोनों की आँखे भर आई |

“चंद्रा देख उदय आया है तो उसके भोजन का प्रवंध कर” रानी मल्हना ने चंद्राबल से कहा फिर ऊदल से बोली “बैठो उदय”

ऊदल पास में रखे एक शाही पलंग में बैठ गया |

ऊदल महल की चार दिवारी को निहारने लगा |

चंद्राबल अल्हड़ता के साथ उछलती हुई कक्ष के बाहर चली गई, ऊदल के समबयस्क चंद्राबल अपने नाम के अनुरूप ही सुन्दर थी, चन्द्रमा सा गोल चेहरा, चाँदनी सा उजला रंग, बड़ी बड़ी आँखे, काले घने लम्बे बाल, लाल रंग का लहंगा पहने उस पर लाल रंग की चुनर ओढ़े चंद्राबल बहुत सुन्दर लग रही थी, उसका बोलने का तरीका रंग ढंग सभी एक राज कुमारियो जैसा ही था |

ऊदल अभी भी कक्ष की सुन्दरता निहार रही था, बड़ा कक्ष जिस पर लगे पत्थरों की नक्कासी जिस पर सुन्दर फूल पत्ती लताये बनी थी, खिडकियों पर रेशमी परदे लगे थे, फर्श पर लाल रंग के राजस्थानी पत्थरों की किनारी बना कर सजाया गया था |

कक्ष में दो बड़े बड़े पलंग जिनमे से एक में ऊदल बैठा था, एक में रानी मल्हना बैठी,हरे रंग का लहगा पहने, हरे रंग की चुनर ओढ़े, हरे रंग की चूड़ियाँ पहने, दोने पैर पलंग पर रखे, एक मसनद पर पीठ टिकाये आराम से बैठी थी |
सहसा उदय की नजर रानी मल्हना पर गई जो उदय को बहुत ध्यान से देख रही रही थी |

“उदय, मुझे ऐसा क्यों लग रहा है जैसे तुम कुछ परेशान से हो, लग रहा है जैसे कोई समस्या है जो तुम मुझे बताना चाह रहे हो लेकिन संकोच में बोल नही पा रहे हो, बताओ बात क्या है ?” रानी मल्हना ने ऊदल से पूछा

नही रानी माँ, ऐसा कुछ भी नही है” ऊदल ने संक्षिप्त सा उत्तर दिया और नज़ारे नीची कर ली |

“ऊदल, मैंने तुम्हे पैदा नही किया तो क्या हुआ दूध तो तुमने मेरा भी पिया है, माँ हूँ तुम्हारी जब तुम बोलना भी नही जानते थे, मै तो उस समय भी तुम्हारा चेहरा देख कर समझ लेती थी तुम भूखे हो या प्यासे, अब तुम मुझसे बात छिपाओगे? ............बताओ क्या बात है ?” रानी मल्हना ने फिर पूंछा |

“रानी माँ मैंने आज एक सपना देखा, मै उसे समझ नही पा रहा हूँ उसका अर्थ क्या है? बस यही उलझन है .... और कुछ नही”

“अरे वाह भाई तो बड़े हो गये, सपने भी आने लगे, कहाँ की राजकुमारी थी सपने में ?” उसी समय चंद्राबल ने कक्ष में प्रवेश करते हुये ऊदल से हसते हुये पूँछा |

ऊदल मुस्कुरा दिया |

“सपने में क्या देखा उदय ?” रानी मल्हना ने गंभीरता पूर्वक पूछा

ऊदल ने विस्तार पूर्वक अपना देखा हुआ सपना सुनाया, पूरा सपना सुनाने के बाद, ऊदल ने रानी मल्हना से पूंछा “रानी माँ बस यही उलझन है, इसी में परेशान हूँ की, कौन थे, ये दोनों महात्मा और मुझसे क्या चाहते है ? क्या अर्थ है इस स्वप्न का ?”

ऊदल ने रानी मल्हना की ओर देखा उनकी आँखों में आँसू थे, ऊदल समझ गया, निश्चित रूप से रानी माँ जानती है इस स्वप्न का अर्थ, कौन है ये महात्मा और मुझसे क्या चाहते है ? उसने फिर रानी मल्हना से पूछा

“बताओ न रानी माँ इस स्वप्न का अर्थ”

“मुझे नही पता, मै कैसे बता सकती हूँ ?”बोल कर रानी चल दी, वो अपने आँसू ऊदल से छिपा रही थी |

“रानी माँ” ऊदल ने पुकारा लेकिन रानी अनसुना सा करके चल दी |

“रानी माँ, मैंने अपनी माँ को यह बात नही बताई क्यों की मै जानता हूँ अगर कोई विशेष बात होगी तो शायद वो मुझसे छिपा जाये, लेकिन मेरा भरोसा आप पर है, मै जानता हूँ आप मुझे दद्दा ब्रम्हा की तरह ही चाहती है, मै तो आपका अच्छा बेटा हूँ, आप मुझसे मत छिपाइये........बताओ ना माँ बात क्या है ?” ऊदल फिर बोला

“नही उदय, मै कुछ नही जानती .... सच में” मल्हना ने कहा और कक्ष से बाहर निकल गई |

“कही ये महात्मा मेरे पिता और काका तो नही ?” ऊदल जोर से बोला, रानी रुकी, ठिठकी, लेकिन ऊदल की ओर देखे बिना ही आगे चली गई |

चंद्राबल सब देख रही थी वो ऊदल के पास आ गई, धीरे से बोली “भाई भोजन कर लीजिये”

ऊदल कुछ नही बोला, चंद्राबल ने देखा ऊदल की आँखों में आंसू थे |

“माँ भाई रो रहे है” बोलती हुई चंद्राबल मल्हना के पास दौड़ कर जाने लगी
“अरे नही” कह कर ऊदल उसके पीछे चल दिया |

चंद्राबल और ऊदल दोनों उस कक्ष में पंहुचे जहाँ ऊदल की माँ देवला और रानी मल्हना पहले से मौजूद थे | ऊदल ने झुक कर अपनी माँ की चरण वन्दना की, ऊदल ने देखा दोनों आँखों में पानी से भरी थी |

“रानी माँ आप दोनों की आँखे बता रही है आप दोनों मुझसे कुछ छिपा रहे है ............ अब तो बता दीजिये” ऊदल दीनता पूर्वक बोला

“नही उदय ऐसा कुछ भी नही है” मल्हना ने फिर मना किया

“भाई आप ये सब छोडो, चलो पहले भोजन ग्रहण करो” चंद्राबल ने ऊदल का हाँथ पकड़ते हुये चलने आग्रह किया, ऊदल ने चंद्रबल को रोकते हुये कहा

“रानी माँ, मैंने आपका दूथ पिया है, मुझे उस दूथ की सौगन्ध, जब तक आप मुझे सब सच सच नही बताती, मै अन्न जल ग्रहण नही करूँगा” ऊदल क्रोधित हो शपथ लेते हुये बोला |

“उदय ! इस तरह छोटी छोटी बांतों में शपथ नही लेते” रानी मल्हना क्रोधित हो बोली

ऊदल कुछ भी नही बोला, नजर नीची किये बैठा रहा,

“भाई” चंद्राबल ने उदय हिलाया, उदय ने नजर नही उठाई, मल्हना ने देवला की ओर देखा, देवला भी शांत थी, निरुत्तर सी दोनों एक दूसरे का मुँह देख रही थी | चंद्राबल सबको आश्चर्य भरी निगाह से देख रही थी | पूर्ण शांति |

कुछ देर की शांति के बाद रानी मल्हना बोली

“महाराज ने, ये सब बताने के लिये, इसकी चर्चा करने के लिये भी, मना किया है, लेकिन उदय तुम्हारी सौगन्ध के कारण, मै तुम्हे सब बताती हूँ,................ वो महात्मा और कोई नही तुम्हारे पिता और काका ही है, जो तुमसे तर्पण करवाना चाहते है”

“मेरे पिता और काका ?? लेकिन मेरे पिता तो .......” ऊदल आगे बोल पाता उसके पहले ही मल्हना बोल उठी

“वो सब, जो तुम्हे दरवार में बताया गया था, सब झूठ है ...........बहुत पुरानी बात है जब तुम पैदा भी नही हुये थे उस समय, एक बार जेठ मास में ..............” रानी मल्हना पुरानी घटना बताने लगी |

क्रमशः
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AMBIKA SHARMA
AUTHOR, MOTIVATOR, TRAINER, BLOGGER
is famous for his unpublished Novel "AARYAN - EK ALOKIK YOUDHA(आर्यन - एक अलौकिक योद्धा)". Mostly authors known for his English Novels but he is standing in the same lobby for his Hindi novels. Currently his Novel "KAUN JEETA AUR KYU (कौन जीता और क्यों)" is available on all e-commerce websites and leading Bookstores. it is another step of success and he enjoying its bestselling. his another Book is also ready to publish name "PARO KE DIYE (पारो के दीये)" and will be available in 2017.

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