बदले की भावना : विनाश को जन्म देती है
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“तेजवान ! अति सुन्दर ! “ सुमाली ने विमान से उतरते युवक को देख कर आश्चर्य चकित होते हुए कहा
“पिता श्री यह कुवेर है देव जाति का कोषाधिकारी “ केकसी ने अपने पिता को बताया
“ओह ! तो यही है देव जाति का धनेश कुवेर “ सुमाली ने गहरी साँस ली .
“हाँ पिता श्री यह यह विश्रवा आश्रम के कुलपति विश्रवा का पुत्र है “ केकसी ने बताया .
“हाँ जानता हूँ ! यह पुलत्स्य का वंशज है “ कुछ सोंचते हुए सुमाली ने अपनी पुत्री से कहा .
“चलो पुत्री चले “
सुमाली और केकसी दोनों चल दिए .जंगल के दुर्गम रास्तो को पर करते हुए ,गुफा और कंदराओ को पर कर एक सुनशान निर्जन स्थान पर पहुचे जहाँ सुमाली के भाई माल्यवान और माली अपने परिवार सहित रुके थे
“अनुज तुम आ गए ?” माल्यवान ने सुमाली को देख कर कहा
“हाँ भ्राता आ भी गया और अपनी दैत्य जाति के उत्थान और चालाक देवो से बदला लेने की योजना भी साथ लाया हूँ “ सुमाली ने कहा
“अरे वाह ! उम्मीदे अभी जीबित है ! बताओ क्या है वह योजना ? “ माली ने उत्सुक हो कर पूछा .
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