_____ सत्य मेरा चिर हो, न हो | मधु सा रस हो, जीवन के लिए || शिव अपने सा संकल्प मुझे दो | लक्ष्य सधे, कर्म हो अर्पण के लिए _____ _________________________________________________Ambika Sharma__________________________________________________

AUTHOR - AMBIKA SHARMA KAUN JEETA AUR KYU BUY NOW @ PUSTAKMANDI.COM AND ONLINEGATHA.COM PRE-ORDER AND BOOK YOUR COPY NOW Stay Connected

Friday, 1 September 2017

चंद्रोदय - 12

(गतांक से आगे )
(भाग-3)

“क्या हुआ मेरी बहन को? उस दुष्ट करिंघा की इतनी हिम्मत ? मै अभी उस पापी की मुस्के बाँध कर लाता हूँ” ठीक इसी समय माहिल वहाँ आया, आते ही चिल्लाने लगा|

“शांत हो जाओ भैया, यहाँ सब ठीक है” रानी ने समझाते हुये, माहिल से कहा फिर सैय्यद की ओर देख कर रानी बोली “इनसे मिलो भैया, ये है बनारस के सरदार ताला सैय्यद, जिनके कारण मै सुरक्षित हूँ”|

“अरे ! मै आपका बहुत ऋणी हूँ, आपने हमें घोर कलंक से बचा लिया” माहिल हाँथ जोड़ कर सैय्यद के सामने खडा हो गया थोडा रुक कर दक्षराज, बक्षराज की ओर देख कर बोला|

“आप लोग कहाँ चले गये थे ? मेरी बहन को अकेला छोड़ कर, अगर कुछ उच्च नीच हो जाती तो मै क्या मुँह दिखाता महाराज को, कोई जिम्मेदारी है आपकी या नही ?”
“राजा माहिल, आपकाइर भी तो आगमन भी इसी उद्देश्य से हुआ था की हम बनाफर जंगली अगर महारानी की रक्षा ना कर पाए तो आप करेंगे फिर भी आप महारानी को अकेला छोड़ कर चले गये जबकि आपको तो पता ही है की शाम के समय हम दोनों भाई नित्य संध्या वंदना के लिये जाते है” बक्षराज ने कटाक्ष किया|

मल्हना मुस्कुरा दी, लेकिन बात संभालते हुये बोली “वो सब छोडिये, आप सब विश्राम कीजिये, सुबह भोर में हमें यहाँ से प्रस्थान करना है”|
सब सिर झुका कर वहाँ से चले गये, दक्षराज और बक्षराज घायल सैनिको के उपचार में लग गये |

लेकिन राजा माहिल की योजना असफल हो गई थी, मन में क्रोध भरे हुये वो सीधा करिंघा के पास पंहुचा |

“क्या मामा, आप मुझसे कोई पुरानी दुश्मनी निभा रहे है क्या ?” करिंघा भी क्रोध में था|

“मैंने क्या दुश्मनी निभाई ? बड़े योद्धा बने फिरते हो, एक योद्धा से भी युद्ध नही जीत सकें” माहिल भी गुस्से में बोला|

“एक योद्धा ? अरे वो योद्धा नही है, वो कोई महारथी है और आप कह रहे थे की वहाँ कोई योद्धा नही होगा” करिंघा दुखी हो कर बोला|

“हाँ, जाने कहाँ से आ गया कोई बनारस का सरदार है नासपीटा” माहिल खीझ भरे स्वर में बोला|

“क्या मामा मेरी तो राजपूती में कलंक लग गया ..............जाने दीजिये फिर कभी बदला तो लूँगा ही अपनी इस बेइज्जती का” करिंघा दुखी था|

“फिर कभी देखने बालो को सिर्फ उतना ही मिलता है जितना कोशिश करने बाले छोड़ दिया करते है इसलिये अब तुम मेरी योजना सुनो, कल सुबह भोर में महुबे का लश्कर यहाँ से चल देगा महुबे के लिये, तुम भी उस लश्कर का पीछा करो कही ना कही तो लश्कर रात्री विश्राम करेगा ही, बस तुम रात्री में लश्कर पर आक्रमण कर देना, असावधान, थके हारे सैनिक सो रहे होंगे, तुम और तुम्हारे सैनिक आराम से लूट करवाँ लोगे” माहिल ने योजना समझाई|

करिंघा ने पूरी योजना सुनने के बाद कहा “हाँ ठीक है मामा जी लेकिन इस बार मै किसी को छोड़ूगा नही, आप अपना सोंच लीजिये कहाँ छिपेंगे ?”

“मै कही ना कही छिप जाऊँगा लेकिन इन बनाफरो को बिलकुल मत छोड़ना भले ही महुबे तक ही पीछा करना पड़े, हाँ आक्रमण रात में ही करना, दिन में उनसे जीत नही पाओगे” महिल खुश हो कर बोला|

“ठीक है” करिंघा भी मुस्कुरा दिया|

“ठीक है, अब मै चलता हूँ, अब मेरी तुम्हारी मुलाक़ात यहाँ नही हो पायेगी” महिल बोला और विदा लेकर महुबे के लश्कर में शामिल हो गया | 


क्रमशः
copyright@Ambika Sharma



<पीछे                                                                                       आगे>

No comments:

Post a Comment

About Me


AMBIKA SHARMA
AUTHOR, MOTIVATOR, TRAINER, BLOGGER
is famous for his unpublished Novel "AARYAN - EK ALOKIK YOUDHA(आर्यन - एक अलौकिक योद्धा)". Mostly authors known for his English Novels but he is standing in the same lobby for his Hindi novels. Currently his Novel "KAUN JEETA AUR KYU (कौन जीता और क्यों)" is available on all e-commerce websites and leading Bookstores. it is another step of success and he enjoying its bestselling. his another Book is also ready to publish name "PARO KE DIYE (पारो के दीये)" and will be available in 2017.

najar.ambika@gmail.com

Recent

Random

randomposts